नई दिल्ली।
भारतीय संस्कृति और विशेष तौर पर हिंदू धर्म में बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन हाल ही में इस परंपरा को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न संत श्री प्रेमानंद जी महाराज से पूछा गया — क्या सच में छोटे जब बड़ों के पैर छूते हैं तो उनसे पुण्य कम हो जाता है?
इस विषय पर महाराज जी ने बड़ी सरलता और गहराई से अपना दृष्टिकोण रखा।
पैर छूना: सम्मान नहीं, पुण्य का आदान-प्रदान
संत प्रेमानंद जी महाराज ने स्पष्ट कहा कि पैर छूना किसी का पुण्य घटने का कारण नहीं, बल्कि पुण्य बढ़ने का माध्यम है।
वे बताते हैं कि जब कोई छोटा व्यक्ति आपके चरण स्पर्श करता है, वह श्रद्धा लेकर आता है और आपका आशीर्वाद लेकर जाता है। यह पुण्य का आदान-प्रदान है, जिसमें किसी का नुकसान नहीं होता।
महाराज जी की भाषा में—
“जैसे नदी में पानी डालो तो नदी घटती नहीं, बढ़ती है… वैसे ही आशीर्वाद देने से पुण्य कभी नहीं घटता।”
पुण्य को घटाता है अहंकार, प्रणाम नहीं
महाराज जी के अनुसार, अगर किसी बड़े के मन में यह भाव आ जाए कि “यह छोटा मेरे पैर छू रहा है, इससे मेरा पुण्य कम होगा”—
तो यही विचार उसके पुण्य को समाप्त करने लगता है।
वे कहते हैं:
“अहंकार ही पुण्य को खाता है। विनम्रता पुण्य बढ़ाती है। जितना झुकोगे उतना ऊपर वाला आपको भरेगा।”
जो लोग पैर छूने से मना करते हैं, उनके बारे में महाराज जी कहते हैं—
“वे अपने ही पुण्य का दरवाज़ा बंद कर लेते हैं।”
शास्त्रों का मत: प्रणाम लेने से पुण्य सौ गुना बढ़ता है
महाराज जी बताते हैं कि शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है—
जिसके पैर छुए जाते हैं, उसका पुण्य सौ गुना बढ़ता है।
उदाहरण के तौर पर:
- श्रीकृष्ण ने स्वयं सुदामा के पैर धोकर यह परंपरा स्थापित की।
- गुरु अपने शिष्य से प्रणाम लेते हैं—पुण्य बढ़ता है।
- माता-पिता बच्चों से आशीर्वाद लेते हैं—पुण्य बढ़ता है।
यह परंपरा पुण्य बांटने की है, घटाने की नहीं।
प्रणाम लेने का सही तरीका
महाराज जी ने बताया कि जब कोई चरण स्पर्श करने आए, तो मन में सोचना चाहिए—
“राधे-राधे… यह राधा-कृष्ण का ही रूप मेरे सामने खड़ा है।”
फिर हाथ जोड़कर आशीर्वाद दें—
“राधा-कृष्ण तुम्हें सुखी रखें।”
महाराज जी के अनुसार यह आशीर्वाद सौ गुना होकर लौटता है।
वे कहते हैं—
“जितने लोग आपके चरण छुएंगे, उतना आपका पुण्य बढ़ेगा। एक दिन ऐसा भी आएगा जब स्वयं राधा-कृष्ण आपके चरण छूने आएंगे।”
















