भोपाल
भोपाल नगर निगम ने भवन अनुमति के नियमों का उल्लंघन कर किए गए एक अवैध निर्माण को हटाने की बड़ी कार्रवाई की है। कोलार क्षेत्र के सर्वधर्म बी-सेक्टर, भवन क्र. 200 में भवन स्वामी श्री मोहम्मद इस्माइल द्वारा भवन अनुमति के विपरीत निर्माण कार्य किया गया था
जानकारी के अनुसार, भवन स्वामी ने फ्रंट एम.ओ.एस., रियर एम.ओ.एस. और साइड एम.ओ.एस. का उल्लंघन करते हुए जी+1 भवन का निर्माण किया था तथा द्वितीय तल पर आर.सी.सी. कॉलम और टीन शेड की सहायता से अवैध निर्माण खड़ा किया गया था।

नगर निगम, भोपाल ने इस अवैध निर्माण के खिलाफ मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत नोटिस जारी कर कार्रवाई की। इसके बाद भवन अनुज्ञा शाखा, यांत्रिकी शाखा और अतिक्रमण शाखा की संयुक्त टीम ने पुलिस बल के सहयोग से उक्त निर्माण को हटाया।
निगम अधिकारियों ने बताया कि उक्त भवन में आवासीय भवन अनुज्ञा के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि संचालित की जा रही थी, जो नियमों का उल्लंघन है। निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में भवन अनुमति के विपरीत किए गए किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा।

मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956, मध्य प्रदेश में नगर निगमों को नियंत्रित करने वाला एक कानून है। यह अधिनियम शहरी स्थानीय निकायों के रूप में नगर निगमों की स्थापना, उनके कामकाज, वार्डों के विभाजन, निर्वाचित निकायों, महापौर और पार्षदों की भूमिका, और उनके द्वारा प्राप्त राजस्व के प्रबंधन के लिए प्रावधान प्रदान करता है। इस अधिनियम में 2023 में संशोधन भी पेश किया गया है।
भोपाल नगर निगम अधिनियम के तहत अब खतरनाक भवनों और अवैध निर्माणों पर कोई राहत नहीं मिलेगी।
धारा 310 के अनुसार, यदि कोई भवन खतरनाक स्थिति में पाया जाता है, तो आयुक्त (Commissioner) को अधिकार है कि वह उस भवन को तुरंत हटाने या मरम्मत कराने के लिए कदम उठाए।
यदि स्थिति अत्यंत गंभीर है और खतरा आसन्न है, तो आयुक्त बिना पूर्व सूचना के भी बलपूर्वक कार्रवाई कर सकते हैं।
अवैध निर्माण करने वालों के लिए भी कानून बेहद सख्त है।
धारा 292(सी) के अंतर्गत, जो व्यक्ति अवैध कॉलोनियों को वैध दिखाने या भवन निर्माण के नियम तोड़ने में लिप्त पाए जाते हैं, उनके खिलाफ 3 से 7 साल की सजा, या ₹10,000 तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
नगर निगम का संदेश साफ है —
“शहर की सुरक्षा और सुव्यवस्थित विकास के लिए अवैध निर्माण और खतरनाक ढांचों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।”
















